“महिला जब वोट देती है तो लोकतंत्र जीवंत होता है, लेकिन जब महिला निर्णय लेती है तो लोकतंत्र सशक्त होता है।”
कार्यक्रम विवरण
- अवसर
- राष्ट्रीय महिला आयोग के 'She is a Changemaker' कार्यक्रम के अंतर्गत "Women in Politics" विषयक एक दिवसीय कार्यशाला
- आयोजक
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)
- मुख्य अतिथि
- श्रीमती विजया रहाटकर, अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग
- विशिष्ट उपस्थिति
- डॉ. बबीता चौहान, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग
- प्रतिभागी
- महिला पार्षद, ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य
- स्थान
- स्मार्ट सिटी ऑडिटोरियम, राजकीय इंटर कॉलेज, बरेली
- तिथि
- 22 मई 2025
The full and equitable participation of women in public life is essential for building strong and vibrant democracies.
नमस्कार। 'She is a Changemaker' कार्यशाला के अंतर्गत Women in Politics के विषय में आयोजित इस कार्यशाला में मंच पर उपस्थित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, हम सभी के लिए एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष आदरणीय श्रीमती विजया रहाटकर दीदी, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान दीदी, और यहाँ आईं सभी महिला पार्षद बहनें, ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य।
मैं पूरी टीम का हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहती हूँ, जिन्होंने आदरणीय प्रधानमंत्री जी के women-led development के दृष्टिकोण को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के 'She is a Changemaker' कार्यक्रम के माध्यम से आगे बढ़ाते हुए इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर इस कार्यशाला का आयोजन किया। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह आयोजन हमें महिलाओं के सशक्तिकरण, राजनीति में महिलाओं की सफल भागीदारी तथा सशक्त और कुशल नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श करने और सटीक समाधान ढूँढने का अवसर प्रदान करेगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग श्रीमती विजया रहाटकर जी के कुशल नेतृत्व में अपने इस विज़न के साथ मिशन मोड में कार्य कर रहा है — “The Indian Woman, secure in her home and outside, fully empowered to access all her rights and entitlements, with opportunity to contribute equally in all walks of life.”
महिलाओं को उनके उचित अधिकार और हक़ दिलाकर, उनके साथ होने वाले भेदभाव और अत्याचार को दूर करने के लिए उपयुक्त नीतियाँ बनाकर, क़ानूनों को लागू कर और योजनाएँ चलाकर उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में समानता और बराबरी की भागीदारी दिलाना — यानी जीवन के सभी क्षेत्रों में समानता और समान भागीदारी प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना।

आदरणीय श्रीमती विजया रहाटकर दीदी ने भारतीय राजनीति और सामाजिक कार्य में 30 से अधिक वर्ष समर्पित किए हैं। उन्होंने अपने सफ़र की शुरुआत ज़मीनी स्तर से एक नगरसेविका के रूप में की थी। वे सामाजिक और आर्थिक विकास तथा महिला-नेतृत्व वाले विकास की प्रबल पक्षधर हैं।
आज इस मंच पर उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत गौरवान्वित करने वाला क्षण है। आज यहाँ आकर मुझे जो सान्निध्य और ज्ञान मिला है, उसके लिए मैं सदैव कृतज्ञ रहूँगी। आयोजक मंडल का हृदय से बहुत-बहुत आभार।
महिला सशक्तिकरण और राजनीति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के समग्र विकास और समृद्धि की कुंजी है। हमें यह समझना होगा कि महिलाएँ न केवल अपने परिवारों के लिए, बल्कि समाज और देश के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। भारत की विकास यात्रा महिलाओं के सशक्तिकरण से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है। 1946 में संविधान सभा (Constituent Assembly) का गठन हुआ था, और इसका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के लिए एक स्थायी संविधान तैयार करना था। इस सभा में सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी जैसी 15 महिलाएँ सदस्य थीं, जिन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया और महिलाओं के अधिकारों, समानता और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाई। उस ऐतिहासिक क्षण से, जब भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी, आज तक हमने एक लंबा सफ़र तय किया है। आज जब देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं, जब वित्त मंत्रालय जैसी अहम ज़िम्मेदारी एक महिला संभाल रही हैं, तब यह साफ़ है कि भारतीय राजनीति में महिलाओं ने अपनी क्षमता और नेतृत्व से एक नई पहचान बनाई है।
यह सिर्फ़ पद नहीं हैं, यह उस संघर्ष, उस बदलाव और उस विश्वास की कहानी है जो भारतीय महिलाओं ने दशकों में रची है। कभी राजनीति के दरवाज़े उनके लिए बंद थे, आज वे उसकी बुनियाद बन चुकी हैं। This is the era of women’s leadership in India — where we are not merely participants, but leaders shaping the future of our society and of India.
और यहाँ मैं एक और ऐसी महान शासिका वीर रानी अहिल्याबाई होल्कर का नाम लेना चाहती हूँ, जिन्होंने अपनी शक्ति और साहस से इतिहास की धारा को मोड़ दिया और अपने दूरदर्शी नेतृत्व के माध्यम से विकास का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। She is an example of administrative excellence for the overall development of society. आज पूरा देश उनका त्रिशताब्दी वर्ष मना रहा है। सच्चे अर्थों में वे एक trailblazer थीं, a woman ahead of her times। आज जब हम 2025 में women empowerment और women-led development की बात करते हैं, तो उन्होंने 18वीं सदी में ही सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपनी बुद्धि, साहस और अटूट आत्मविश्वास से अपनी क्षमता साबित की। She has set an example of visionary leadership for all of us.
1992 में एक क्रांतिकारी निर्णय लिया गया — स्थानीय प्रशासनिक निकायों, जिन्हें हम पंचायती राज कहते हैं, में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। उस समय इस निर्णय को केवल एक प्रतीकात्मक कदम माना गया; लोगों का मानना था कि इससे महिलाओं को असली सत्ता या निर्णय लेने का अधिकार नहीं मिलेगा। लेकिन आज, 30 वर्षों बाद, यह स्पष्ट है कि इस पहल ने न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई, बल्कि ज़मीनी स्तर पर एक सकारात्मक और स्थायी बदलाव की नींव भी रखी। यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। महिलाओं की भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेहतर निर्णय लिए जाने लगे हैं।

आज भारत की लगभग 14 लाख महिलाएँ त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में कार्यरत हैं — यह विश्व का सबसे बड़ा महिला लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व है। आज देशभर में लाखों महिलाएँ प्रधान, सरपंच, वार्ड सदस्य और ज़िला पंचायत सदस्य बनकर गाँवों की दिशा और दशा बदल रही हैं। महिला प्रधान बनने के बाद गाँव की महिलाओं ने ग्राम सभा में अपनी भागीदारी बढ़ाई। जिन पंचायतों का नेतृत्व महिला सरपंचों के हाथ में है, वहाँ पेयजल, स्वच्छता और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर अधिक ध्यान और निवेश देखा गया है।
भारत में महिला सरपंचों ने पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए पंचायती राज व्यवस्था में नेतृत्व की नई मिसाल क़ायम की है। You all are indeed changemakers. Changemakers वे व्यक्ति होते हैं जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करते हैं। वे किसी समस्या को केवल पहचानते ही नहीं, बल्कि उसका समाधान खोजने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास भी करते हैं।
आप सभी दूरदर्शी हैं, आप साहसी हैं; जहाँ लोग केवल समस्या देखते हैं, वहाँ आप समाधान ढूँढती हैं।
अगर आप में से कोई भी अपने गाँव या वार्ड में स्वच्छता या बालिका शिक्षा को बढ़ावा देती है, तो आप भी चेंजमेकर हैं। अगर आप सभी वर्गों को साथ लेकर चलती हैं — चाहे वे महिलाएँ हों, युवा हों, वंचित समुदाय हों या ग्रामीण क्षेत्र — अगर आप रात और दिन की परवाह किए बिना लोगों की परेशानियों को कम करने के लिए उनके साथ खड़ी हैं, तो आप भी चेंजमेकर हैं।
जैसे भक्ति शर्मा, जो मध्य प्रदेश के बरखेड़ी अब्दुल्ला गाँव की सबसे युवा सरपंच बनीं; उन्होंने अपने कार्यकाल में स्वच्छता, सोलर लाइट्स और डिजिटल सुविधाओं को प्राथमिकता दी। इसी तरह छवि राजावत ने एमबीए डिग्री के बावजूद गाँव की सेवा को चुना और सोडा गाँव को एक मॉडल पंचायत बनाया। हरियाणा की सुषमा भादू ने पर्दा प्रथा तोड़ी और बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया। आरती देवी (ओडिशा), वंदना बहादुर (मध्य प्रदेश), मीना बहन (गुजरात) और माधुलिका रामटेके (छत्तीसगढ़) जैसी अनेक महिलाओं ने साबित किया कि जब नेतृत्व महिलाओं के हाथ में होता है, तो विकास अधिक समावेशी और संवेदनशील होता है।
आप सभी और ये सभी उदाहरण “महिला नेतृत्व में विकास” की दिशा में प्रेरणास्रोत हैं।
यह हमारा सौभाग्य है कि हमने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के रूप में इतिहास को बनते हुए न केवल देखा, बल्कि हम उस परिवर्तन यात्रा का सक्रिय हिस्सा भी बन रहे हैं, जो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

इन उपलब्धियों के बावजूद हम सभी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके विकास के मार्ग में कई सामाजिक, आर्थिक चुनौतियाँ और रूढ़िवादी धारणाएँ (stereotypes) सामने आती हैं, जो उनके आत्मनिर्भर बनने, नेतृत्व की भूमिका निभाने और अपने अधिकारों का समुचित उपयोग करने में रुकावट डालती हैं। यही कारण है कि उनके सशक्तिकरण की प्रक्रिया अक्सर धीमी हो जाती है।
भारत में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के मार्ग में कई अड़चनें हैं, जिनमें पैसे की कमी, राजनीतिक दबदबा, हिंसा, व्यक्तिगत हमले और बहुत कुछ शामिल है। चुनाव लड़ने के लिए संसाधन चाहिए होते हैं, जो केवल सहयोगी पारिवारिक व्यवस्था के साथ ही जुटाए जा सकते हैं, और यह बहुत-सी महिलाओं के पास नहीं होती। कई बार महिलाएँ पारिवारिक ज़िम्मेदारियों में उलझी रहती हैं।
कुछ नव-निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को ब्लॉक और ज़िला प्रशासन, विभागीय अधिकारियों और पुलिस से संवाद करने में कठिनाई होती है। ऐसे में महिला प्रतिनिधियों से जुड़े पुरुष प्रतिनिधि या नेता बाहरी संस्थाओं के साथ बातचीत में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इससे कई बार महिलाओं की उपस्थिति सिर्फ़ प्रतीकात्मक रह जाती है। बिना शिक्षा और आवश्यक कौशल (required skills) के महिलाएँ आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं और निर्णय प्रक्रिया में सीमित भूमिका निभाती हैं।
यह कार्यशाला इस स्थिति को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लेकिन इसके साथ-साथ, अपनी पूरी क्षमता को उजागर करने के लिए इन चुनौतियों का समाधान करना अत्यंत आवश्यक है, और यह कदम हमें स्वयं ही उठाने होंगे। आप सभी को यह समझना होगा कि आप केवल 'प्रतीकात्मक' पद पर नहीं हैं, बल्कि निर्णायक पद पर हैं। आप किसी की प्रतिनिधि नहीं, बल्कि पूरे गाँव या वार्ड की नेता हैं।
किसी भी प्रस्ताव, योजना या फंड के उपयोग की संपूर्ण जानकारी लें, सवाल पूछें और अपनी राय स्पष्ट रखें। हो सकता है शुरू में आपको कुछ बातें समझ में न आएँ, लेकिन याद रखिए, सीखने की कोई उम्र नहीं होती। Learning is a continuous process — सीखना निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। अपने मन में सीखने का हौसला रखिए।
हमें एक ऐसा अनुकूल वातावरण बनाना होगा जिसमें महिलाएँ आगे आ सकें। आपको निडर, साहसी और आत्मविश्वासी बनना होगा, मुद्दों की गहरी समझ रखनी होगी, ज्ञान अर्जित करना होगा, पढ़ाई करनी होगी और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करनी होगी। और जब यह अनुकूल माहौल बन जाएगा, तब आप उसका पूरा लाभ उठा सकेंगी।
आरक्षण ने महिलाओं को अपनी क्षमताओं को सिद्ध करने का मौक़ा दिया है। इसलिए मैं कहूँगी कि अनुकूल वातावरण के साथ-साथ राजनीतिक आरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। विधानसभा और संसद में आरक्षण लागू होने पर मुझे पूरा विश्वास है कि हम और अधिक सशक्त महिलाओं को देखेंगे — जो महिलाओं के मुद्दों पर बोलेंगी और उनके पक्ष में नीतियाँ और क़ानून बनाएँगी। एक महिला प्रतिनिधि होने के नाते मैं महिलाओं की समस्याओं को बेहतर समझती हूँ। हम सभी के पास परिश्रम, ईमानदारी, बुद्धिमत्ता और करुणा का एक ऐसा संतुलन है, जो हमें नेतृत्व की एक अद्भुत क्षमता देता है।

इसी सोच के साथ इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और सक्रिय महिला राजनीतिज्ञों के नेतृत्व कौशल को विकसित करना है, ताकि भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की समान और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का बहुत-बहुत धन्यवाद।
याद रखिए —
“महिला जब वोट देती है तो लोकतंत्र जीवंत होता है, लेकिन जब महिला निर्णय लेती है तो लोकतंत्र सशक्त होता है।
We are the changemakers! चलिए, समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाते हैं।”
जय हिन्द।