श्रुति गंगवार
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भाषण

रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर — जन्म दिवस समारोह

Rajju Bhaiya Sainik Vidya Mandir — birth anniversary programme

“आइए, हम सब मिलकर विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें।”

कार्यक्रम विवरण

अवसर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चौथे सरसंघचालक श्रद्धेय रज्जू भैया जी का जन्मदिवस
आयोजक
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान
मुख्य अतिथि
श्री भैयाजी जोशी जी
विशिष्ट उपस्थिति
डॉ. प्रदीप जोशी, अध्यक्ष, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA)
स्थान
रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर, रज्जू भैया सरस्वती विहार, खंडवाया, शिकारपुर, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)
तिथि
29 जनवरी 2025

नमस्कार। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर के प्रांगण में परम श्रद्धेय श्री रज्जू भैया जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में मंच पर उपस्थित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, हम सभी के लिए एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व, परम आदरणीय श्री भैयाजी जोशी जी, जिनका जीवन और कार्य संघ के विचारों और आदर्शों का प्रतीक है, जिनका दृष्टिकोण हमेशा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का रहा है, उनको मेरा सादर प्रणाम।

मंच की शोभा बढ़ा रहे परम आदरणीय डॉ. प्रदीप जोशी जी, जिनके द्वारा बताए गए आदर्शों को मुझे आत्मसात करने का अवसर मिला, द्वि-क्षेत्र प्रचार प्रमुख परम आदरणीय श्री कृपा शंकर जी, क्षेत्र संघचालक परम आदरणीय श्री सूर्य प्रकाश टोंक जी, डॉक्टर प्रभाकर राय जी, श्री डोमेश्वर साहू जी एवं समस्त विशिष्ट जन और आज इस विद्यालय के सभी शिक्षकगण एवं प्रिय विद्यार्थियों।

आज इस मंच पर उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत गौरवान्वित करने वाला क्षण है। आज यहाँ आकर मुझे जो सान्निध्य और ज्ञान मिला है, उसके लिए मैं सदैव कृतज्ञ रहूँगी। आयोजक मंडल का हृदय से बहुत-बहुत आभार।

जब भी महान व्यक्तियों पर चर्चा का आयोजन किया जाता है, तब ऐसे व्यक्तित्वों के विचारों, कार्यों और दृष्टिकोण पर होने वाली चर्चा समाज को एक सकारात्मक दिशा में प्रभावित करती है।

ऐसे ही, आज का दिन हमारे लिए गर्व और प्रेरणा का है। हम यहाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चौथे सरसंघचालक, श्रद्धेय आदरणीय रज्जू भैया जी की जयंती के अवसर पर एकत्रित हुए हैं। उनका जीवन और विचार पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक हैं। अपने निःस्वार्थ स्नेह के कारण आदरणीय रज्जू भैया सबके प्रिय थे। रज्जू भैया जी का जीवन सादगी और त्याग का उदाहरण है।

श्रद्धेय रज्जू भैया जी का शिक्षा के प्रति लगाव शुरू से ही रहा। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी (Physics) में शिक्षा प्राप्त की और एक प्रख्यात भौतिक वैज्ञानिक के रूप में पहचान बनाई। एक प्रतिभाशाली शिक्षाविद होने के साथ-साथ उन्होंने राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि “मनुष्य का सर्वांगीण विकास करना ही शिक्षा का मूल उद्देश्य है।”

भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ़ किताबों से ज्ञान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास भी है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान देना होना चाहिए।

आज के संदर्भ में इसे समझना और भी ज़रूरी हो गया है, because today education should not be limited to academic skills; It is also important to teach our students life skills to cope with today’s ever-changing environment more efficiently.

आदरणीय रज्जू भैया जी के इन्हीं विचारों को अपना मंत्र मानकर विद्या भारती शिक्षा को सिर्फ़ एक शैक्षिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक जीवन शैली और संस्कार के रूप में प्रस्तुत करती है। यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है कि विद्या भारती प्रमुखता के साथ भारतीय संस्कृति, मूल्यों और नैतिकता के आधार पर शिक्षा देने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है।

“सा विद्या या विमुक्तये” — Knowledge is that which liberates us — शिक्षा वही है जो हमें मुक्त करे: अज्ञानता से, संकीर्णता (narrow-mindedness) से, और सामाजिक, मानसिक या भावनात्मक बंधनों से। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से सोचने, समझने और अपने आत्मसम्मान और अधिकारों को पहचानने की शक्ति देती है।

श्रद्धेय रज्जू भैया जी का एक और विचार, जिसने मुझे अत्यंत प्रभावित किया — “All people are basically nice. Primarily every person is nice and everyone is reliable.”

हर व्यक्ति के अंदर अच्छाई होती है, और हमें यह समझना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति अपने अतीत के कारण कभी-कभी नकारात्मकता दिखा सकता है, लेकिन उसका वास्तविक स्वभाव अच्छा ही होता है।

रज्जू भैया जन्मदिवस समारोह के मंच पर अतिथिगण
रज्जू भैया जन्मदिवस समारोह के मंच पर अतिथिगण

यह विचार हमें एक बेहतर और सहयोगपूर्ण समाज की दिशा में ले जाएगा, जहाँ लोग एक-दूसरे की अच्छाई को पहचानकर समाज में सकारात्मक और रचनात्मक (positive and constructive) बदलाव ला सकते हैं, जिससे समग्र समाज का विकास होगा।

आज जब हम शिक्षा की बात कर रहे हैं, समाज की बात कर रहे हैं, तब हमें समाज में महिलाओं की भूमिका पर भी चर्चा करनी चाहिए। महिलाएँ समाज का अभिन्न हिस्सा हैं, और उनके योगदान के बिना किसी भी समाज या राष्ट्र का विकास अधूरा है। हमें यह समझना होगा कि महिलाएँ न केवल अपने परिवारों के लिए, बल्कि समाज और देश के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता का विकास, और शिक्षा इसका सबसे बड़ा माध्यम है। महिलाओं के लिए शिक्षा को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षा से ही महिलाएँ भविष्य के लिए बेहतर निर्णय ले सकती हैं। परिणामस्वरूप महिलाएँ न केवल अपने परिवारों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती हैं।

आप युवा छात्र हमारे देश का भविष्य हैं, और जिस दिशा में आप बढ़ेंगे, वही हमारे देश की दिशा तय करेगी। स्वामी विवेकानंद जी का आदर्श हमें सदैव यह सिखाता रहेगा कि “हमारे भीतर जो शक्ति है, वह हमें महान कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।” आपके भीतर वह ऊर्जा और क्षमता है, जिससे आप कोई भी लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं, कोई भी सपना पूरा कर सकते हैं।

आपकी प्रतिभा और आपकी ऊर्जा को जिस तरह के मार्गदर्शन (guidance) और मेंटरशिप की आवश्यकता है, मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपका विद्यालय आपको उसी दिशा में ढाल रहा है और मार्गदर्शन दे रहा है। आप सभी का योगदान हमारे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

हमारे पास अपने पारंपरिक ज्ञान में नवाचार (innovation) करके दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने की क्षमता है। हम विकास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं। यह संतुलन हमें न केवल वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में सक्षम बनाएगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भी संरक्षित रखेगा।

यहाँ पर मैं आप सभी से एक बात और कहना चाहूँगी कि हमारा संविधान, जो हम सभी का मार्गदर्शक प्रकाश (guiding light) है, उसमें हमारे मौलिक अधिकारों (fundamental rights) और मौलिक कर्तव्यों (fundamental duties) — दोनों का वर्णन है। According to the Indian Constitution, one of our fundamental duties states that every citizen should “strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity” — meaning that every citizen should aim to perform their best in all aspects of their life, contributing to the nation’s progress and achievement at the highest level.

समारोह को संबोधित करते हुए
समारोह को संबोधित करते हुए

यह विचार केवल किसी एक क्षेत्र में श्रेष्ठता प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर कार्य में — चाहे वह व्यक्तिगत हो या सामूहिक — उत्कृष्टता (excellence) को अपनाने की प्रेरणा देता है।

Striving towards excellence is a continuous process — यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

इसका उद्देश्य हर नागरिक को अपनी क्षमता के अनुसार सर्वोत्तम प्रयास करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि देश की प्रगति में योगदान दिया जा सके। जब एक व्यक्ति अपने जीवन में उत्कृष्टता की ओर प्रयास करता है, तो उसका प्रभाव समाज और राष्ट्र पर पड़ता है, जिससे एक सशक्त और समृद्ध देश का निर्माण होता है — to benefit our country.

अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, बरेली की अध्यक्ष के रूप में मैं कह सकती हूँ कि हमारा बैंक इसी दृष्टिकोण के साथ काम कर रहा है — सिर्फ़ बैंकिंग के लिए नहीं, बल्कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए। हमारा हमेशा यही प्रयास रहा है कि सहकारिता की सेवाएँ हर वर्ग तक पहुँचें। मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि सहकारी बैंकों के माध्यम से हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं, जहाँ हर व्यक्ति को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिले — to benefit all sections of society.

मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस विद्यालय में आप सभी का राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ ज़िम्मेदार नागरिकों के रूप में विकास हो रहा है।

राष्ट्र रक्षा समं पुण्यं — राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं; राष्ट्र रक्षा सर्वोपरि है।

कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में मंच पर
कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में मंच पर

मेरा आपसे अनुरोध है कि आप अपने सपनों को देश के सपनों से जोड़ें। अपने कौशल और ऊर्जा का उपयोग सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए करें।

“We should collectively and actively work to make ourselves and our society better; only then will we have a better future.” — रज्जू भैया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जो अपनी स्थापना के 100वें वर्ष में है, सदैव ही मानव निर्माण के साथ समाज एवं राष्ट्र निर्माण का प्रेरक रहा है और आज एक बड़ी भूमिका में है। संघ संपूर्ण समाज को संगठित करने का कार्य कर रहा है और समाज निर्माण की भूमिका निभाते हुए पूरे समाज में कुटुंब भाव जगाने का काम कर रहा है।

आइए, हम सब मिलकर विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें। यह समय है नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का, और एक ऐसा भारत बनाने का, जो हर स्तर पर विकसित और सशक्त हो।

सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की शुभकामनाएँ!

जय हिन्द ।