श्रुति गंगवार
Share your idea
भाषण

भारतीय शिक्षण मण्डल, ब्रज प्रान्त — 57वाँ स्थापना दिवस

Bharatiya Shikshan Mandal, Braj Prant — 57th Foundation Day

“'चरैवेति चरैवेति!' — बढ़ते रहें, चलते रहें!”

कार्यक्रम विवरण

अवसर
भारतीय शिक्षण मण्डल, ब्रज प्रान्त का 57वाँ स्थापना दिवस
आयोजक
भारतीय शिक्षण मण्डल, ब्रज प्रान्त
स्थान
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली
तिथि
28 मार्च 2026

भारतीय शिक्षण मण्डल, जो शिक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीय पुनरुत्थान के उद्देश्य से कार्यरत है, के स्थापना दिवस के अवसर पर उपस्थित सभी प्रबुद्ध शिक्षाविदों, कर्मठ कार्यकर्ताओं और भारत के भविष्य के शिल्पकारों को मेरा सादर नमन। यह बहुत हर्ष और गर्व की बात है कि यह संगठन 'मनुष्य निर्माण' और 'राष्ट्र पुनरुत्थान' का कार्य करता है।

What is the purpose of education? — शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है?

Is education a place designed to produce future employees — where the primary goal is to teach us how to read, write and follow instructions? Or is it something far deeper — a process that cultivates critical thinking, nurtures creativity, and empowers us to challenge the world around us?

हमारी संस्कृति, हमारी भारतीय परंपरा कहती है — ‘सा विद्या या विमुक्तये’ — अर्थात, शिक्षा वही है जो हमें बंधनों से मुक्त करे। शिक्षा का अर्थ केवल साक्षरता नहीं, बल्कि अज्ञानता से मुक्ति है — जो मनुष्य को स्वतंत्र बनाए, उसे आत्मज्ञान दे।

57वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का मंच
57वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का मंच

भारतीय शिक्षा की गुरुकुल प्रणाली ‘मनुष्य-निर्माण’ पर आधारित थी। गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक थे, जिनका लक्ष्य था एक संपूर्ण मानव का निर्माण करना, जो समाज में योगदान दे सके।

बाद में लॉर्ड मैकाले ने एक ऐसी प्रणाली प्रस्तुत की जो ब्रिटिश साम्राज्य की सेवा के लिए बनाई गई थी, that viewed education as a tool for administrative efficiency — जहाँ शिक्षा का मानकीकरण करके उसे एक फ़ैक्टरी मॉडल के रूप में ढाल दिया गया। आज NEP 2020 के साथ ‘आत्मनिर्भरता’ का युग है; आत्मनिर्भरता (self-reliance) ही विकसित भारत 2047 का विज़न है। NEP 2020 में critical thinking के साथ life skills पर ध्यान है, मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को आगे बढ़ाने का कार्य हो रहा है, और शिक्षा के multidisciplinary approach के माध्यम से Humanities, Commerce और STEM के बीच की कठोर सीमाओं (rigidity) को लचीलेपन (fluidity) में बदला जा रहा है — ताकि ऐसे global citizens का निर्माण हो, जो भारतीय मूल्यों से जुड़े हों।

NEP 2020 aims to help us reach our maximum potential — what we can become; हमारी क्षमताएँ क्या हैं।
भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति है, और यही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है। We have the world’s largest youth population — 65 percent of India’s population is below the age of 35.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए

आज का युवा सोचता है, सवाल करता है और बदलाव लाने का साहस भी रखता है। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इस ऊर्जा को सही दिशा मिले।
ऊर्जा अगर सही दिशा में लगे, तो निर्माण करती है… इसलिए आज आवश्यकता है — सिर्फ़ शिक्षित युवा की नहीं, बल्कि संस्कारित, जागरूक और ज़िम्मेदार युवा की, जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे, जो अपने करियर के साथ-साथ अपने राष्ट्र के बारे में भी सोचे।

“The ignited mind of the youth is the most powerful resource on the earth, under the earth and above the earth.” — Dr. A.P.J. Abdul Kalam.

Ignited minds have living, breathing dreams. It is a state of mind that is not merely a “storage house of information” but a “powerhouse of transformation.” Beyond information — जिसमें जिज्ञासा है। It asks “Why?” and “How?” instead of just “What?”

जिसमें Spark of Purpose है — when your dreams align with the country’s progress: ignited minds are those that have moved from self-interest to national interest. जब युवा अपने सपनों को राष्ट्र से जोड़ देता है, तभी एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण होता है। There should be an alignment of individual dreams and goals with the nation’s vision.

स्मृति-चिह्न भेंट
स्मृति-चिह्न भेंट

शिक्षा — समानतामूलक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम: हर व्यक्ति को अवसर मिले, चाहे वह गरीब हो, महिला हो या किसी वंचित वर्ग से हो। जब शिक्षा सभी तक पहुँचती है, तभी समाज में वास्तविक बदलाव आता है। शिक्षा केवल ज्ञान का साधन नहीं है; यह समाज परिवर्तन और सशक्तिकरण का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।

बहुत हर्ष का विषय है कि भारतीय शिक्षण मण्डल (BSM) इसी विचारधारा को आगे ले जा रहा है।

ऐसी शिक्षा, जो केवल ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की क्षमता दे — जिसमें चरित्र निर्माण (character building), आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता हो, और सत्य, साहस और अनुशासन का संगम हो; ऐसे व्यक्तित्व का विकास करे, जो शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक रूप से मज़बूत हो।

मंच से संबोधन
मंच से संबोधन

शिक्षा के माध्यम से जागरूकता का प्रसार हो, सामाजिक सुधार और एकता इसका आधार हों, और शिक्षा, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास तथा नैतिक मूल्यों के पुनर्जागरण से देश को हर क्षेत्र में फिर से मज़बूत, समृद्ध और जागरूक बनाया जाए।
मनुष्य निर्माण से ही राष्ट्र पुनरुत्थान होता है। जब अच्छे, सशक्त और ज़िम्मेदार नागरिक बनते हैं, तभी एक मज़बूत राष्ट्र बनता है।

आज भारतीय शिक्षण मण्डल के हम सभी कार्यकर्ताओं का यह पुनीत कर्तव्य है कि हम इस विज़न को धरातल पर उतारें। यदि हम आज अपनी शिक्षा को 'भारतीयता' और 'आधुनिकता' के संगम से सींच पाए, तो विश्वास मानिए कि 'विकसित भारत 2047' का हमारा सपना केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि एक जीवंत सत्य होगा। आइए, हम सब मिलकर भारत को पुनः 'विश्व गुरु' के सिंहासन पर आसीन करने के इस पथ पर निरंतर बढ़ते रहें।

शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन एक लंबी यात्रा है। 'चरैवेति चरैवेति!' — बढ़ते रहें, चलते रहें! हमें बिना थके, बिना रुके निरंतर वैचारिक क्रांति की मशाल जलाए रखनी है।

भारत माता की जय! वन्दे मातरम्!